नवीन जीवन

आप दुसरों के लिए वही पसन्द करें जो अपने लिए पसन्द करते है….. असल जीवन की यही वास्तविक्ता है।

अल्लाह की ओर से क्षमा और माफी का महीना रमजान

अल्लाह की ओर से क्षमा और माफी का महीना रमजान

अल्लाह तआला रमज़ान महीने में अपनी क्षमा और दया का वर्षा करता है।  जिस कारण रमज़ान महीने में एक मुमिन का दिल खूशी और हर्षा से फूले नहीं समाता है, वह चाहता है कि अल्लाह से इस पवित्र महीने में अपनी गुनाहों , भूल चुक, अप्राधों की क्षमा कराले, (मानव अधिकार के अलावा), अल्लाह की नेमतों से अपनी झोली भर ले, जन्नन में प्रवेश होने का प्रमाण पत्र प्राप्त कर ले, जहन्नम से मुक्त होने का प्रमाण पत्र हासिल कर ले,

नेकियों पर उत्साहित करते हुए नबी (अलैहिस्सलातु वस्सलाम) फरमाते हैं,  ” रमज़ान की प्रथम रात को सरकश जिन और शैतान को जकड़ दिया जाता है , और  जन्नत ( स्वर्ग) के द्वार खोल दिये जाते हैं तो उस का कोई द्वार बन्द नही रहता तथा जहन्नम (नरक) के द्वार बन्द कर दिये जाते है और उस का कोई द्वार खुला हुआ नही होता और अल्लाह की ओर से पुकारने वाला पुकारता है , हे ! नेकियों के काम करने वालों , पुण्य के कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लो, और हे ! पापों के काम करने वालों , अब तो इस पवित्र महीने में पापों से रुक जा, और अल्लाह तआला नेकी करने वालों को प्रति रात जहन्नम ( नरक ) से मुक्ति देता है।” (सहीह उल जामिअ , अलबानी)

रोज़ा रखने का पुण्य बहुत ज़्यादा है और वास्तविक्ता यह हैकि कोई मानव रोज़े के पुण्य का कल्पना ही नहीं कर सकता है क्यों कि अल्लाह तआला ने रोज़ेदार को स्वयं बदला देने का वादा किया है और जिस वस्तु का बदला अल्लाह देगा वह बहुत ज़्यादा होगा जैसा कि हदीस क़ुद्सी में अल्लाह तआला फरमाता है। जैसा कि प्रिय रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया ” मनुष्य के हर कर्म पर, उसे दस नेकी से लेकर सात सौ नेकी दी जाती है सिवाए रोज़े के, अल्लाह तआला फरमाता है कि रोज़ा मेरे लिए है और रोज़ेदार को रोज़े का बदला दूंगा, उस ने अपनी शारीरिक इच्छा ( संभोग) और खाना – पीना मेरे कारण त्याग दिया, ( इस लिए इसका बदला मैं ही दूंगा) रोज़ेदार को दो खुशी प्राप्त होती है, एक रोज़ा खोलते समय और दुसरी अपने रब से मिलने के समय, और रोज़ेदार के मुंह की सुगंध अल्लाह के पास मुश्क (कस्तुरी) की सुगंध से ज़्यादा खुश्बूदार है।  ( बुखारी तथा मुस्लिम)

इसी तरह जन्नत ( स्वर्ग ) में एक द्वार एसा है जिस से केवल रोज़ेदार ही प्रवेश करेंगे, रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है, ” जन्नत ( स्वर्ग ) के द्वारों की संख्याँ आठ हैं, उन में से एक द्वार का नाम रय्यान है जिस से केवल रोज़ेदार ही प्रवेश करेंगे  ”

रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने साथियों को शुभ खबर देते हुए फरमाया ” तुम्हारे पास रमज़ान का महिना आया है,यह बरकत वाला महिना है,अल्लाह तआला तुम्हें इस में कृपा से ढ़ाप लेगा, तो रहमतें उतारता है, पापों को मिटाता है, और दुआ स्वीकार करता है और इस महीने में तुम लोगों का आपस में इबादतों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने को देखता है, तो फरिश्तों के पास तुम्हारे बारे में बयान करता है, तो तुम अल्लाह को अच्छे कार्ये करके दिखाओ, निःसन्देह बदबख्त वह है जो इस महिने की रहमतों से वंचित रहे.  ” ( अल – तबरानी)

रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया ” जो व्यक्ति रमज़ान महीने का रोज़ा अल्लाह पर विश्वास तथा पुण्य की आशा करते हुए रखेगा , उसके पिछ्ले सम्पूर्ण पाप क्षमा कर दिये जाएंगे ”      ( बुखारी तथा मुस्लिम)

रोज़ा और कुरआन करीम  क़ियामत के दिन अल्लाह तआला से बिन्ती करेगा के रोज़ा रखने वाले , कुरआन पढ़ने वाले को क्षमा किया जाए तो अल्लाह तआला उसकी सिफारिश स्वीकार करेगा, जैसा कि रसूल मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है ” रोज़ा और कुरआन करीम  क़ियामत के दिन अल्लाह तआला से बिन्ती करेगा कि ऐ रब, मैं उसे दिन में खाने – पीने और संभोग से रोके रखा तो मेरी सिफारिश उस के बारे में स्वीकार कर, कुरआन कहेगा, ऐ रब, मैं उसे रातों में सोने से रोके रखा तो मेरी सिफारिश उस के बारे में स्वीकार कर, तो उन दोनो की सिफारिश स्वीकार की जाएगी ” (मुस्नद अहमद और सही तरग़ीब वत्तरहीब)

फजर की आज़ान से पूर ही से खाने – पीने तथा संभोग से सुर्य के डुबने तक रुके रहने का नाम रोज़ा है। रोज़ा की असल हक़ीक़त यह कि मानव हर तरह की बुराई , झूट , झगड़ा लड़ाइ, गाली गुलूच, तथा गलत व्यवहार और अवैध चीज़ो से अपने आप को रोके रखे ताकि रोज़े के पुण्य उसे प्राप्त हो, जैसा कि रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है ” जो व्यक्ति अवैध काम और झूट और झूटी गवाही तथा जहालत से दूर न रहे तो अल्लाह को कोई अवशक्ता नही कि वह भूका और पियासा रहे ”  ( बुखारी )

यदि कोई व्यक्ति रोज़ेदार व्यक्ति से लड़ाइ झगड़ा करने की कोशिश करे तो वह लड़ाइ, झगड़ा न करे बल्कि स्थिर कहे कि मैं रोज़े से हूँ, जैसा कि रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन है ” जब तुम में कोइ रोज़े की हालत में हो तो आपत्तिजनक बात न करे, जोर से न चीखे चिल्लाए, यदि कोइ उसे बुरा भला कहे या गाली गुलूच करे तो वह उत्तर दे, मैं रोज़े से हूँ। ”  ( बुखारी तथा मुस्लिम)

गोया कि रमज़ान महीने में अल्लाह तआला की ओर से दी जाने वाली माफी, अच्छे कर्मों से प्राप्त होनी वाली नेकियाँ, हम उसी समय हासिल कर सकते हैं जब हम रोज़े की असल हक़कीत के साथ रोज़ा रखेंगे और एक महीने की प्रयास दस महिने की कोशिश के बराबर होगी।

अल्लाह हमें और आप को इस महिने में ज्यादा से ज़्यादा भलाइ के काम, लोगों के कल्याण के काम, अल्लाह की पुजा तथा अराधना की शक्ति प्रदान करे ताकि हमारी झोली में पुण्य ही पुण्य हो,  आमीन

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