वुज़ू का तरीक़ा

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

वुज़ू का तरीका

हदीस

 

नबी स0 अ0 व0 स0 साद रज़ि0 के निकट से गुज़रे और वह वुज़ू कर रहे थे (और पानी का प्रयोग अत्यधिक कर रहे थे) आप ने कहाः यह क्या अपब्यय है ? तो उन्हो ने कहाः क्या वुज़ू में अपब्यय है ? आप ने कहाः हाँ ! और यधपि तुम बहते नदी पर ही क्यो न हो ?>> (इब्ने माजः)

वुज़ू का नियम

 नीयतः

वुज़ू आरंभ करें तो सब से पहले वुज़ू की नीयत करें और नीयत का स्थान ह्रदय है जैसा कि नबी स0 अ0 व0 स0 ने फरमाया << निःसंदेह हर प्रकार का कर्तव्व नीयत पर आधारित है। >> (बुखारी तथा मुस्लिम)

( <<बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम >> कहना जैसा कि नबी स0 अ0 व0 स0 ने कहा हैं।   (बिना वुज़ू के नमाज़ नहीं और बिना अल्लाह का नाम लिये वुज़ी नहीं।) (सुनन तिर्मिज़ी)

 अपने हथैली को तीन बार धुलें और उंगलियों के दरमियानी भाग को दुसरे हाथ  की गलियों से रगढ़ें

कुल्ली करें,तीन बार पानी मुंह में डालें और हिला कर फेंक दें और वुज़ू के बीच दांतून करना अच्छा है।

 तीन बार नाक में पानी डाल कर नाक साफ करें और दायें हथैली से नाक में पानी डालना और बायें हाथ से नाक साफ करना अच्छा है जैसा कि नबी स0 अ0 व0 स0 से प्रमाणित है।

 अपने चेहरे को तीन बार धुलें पैशानी के बाल से ठोढ़ी के नीचे तक और दायें कान की लौ से बायें कान की लौ तक और यदि घनी दाढ़ी हो तो पानी से खिलाल करें और खिलाल  पानी से तर उंगलियों को दाढ़ी के बीच दाखिल करने का नाम है।

 तीन बार अपने दायें हाथ को कोहनी तक धुलें फिर तीन बार अपने बायें हाथ को कोहनी तक धुलें और वुज़ू के अंगो का रगढ़ना मुस्तहब है।

 अपने माथा का आगे से पीछे और पीछे से आगे तक एक बार मसह करें फिर दोनों कान का भी एक बार मसह करें

 अपने दायें पैर को टखनें तक तीन बार धुलें फिर इसी तरह बायें पैर धुलें और पैर की उंगलियों के बीच खिलाल करें और टखनों के ऊपर तक धौना मुस्तहब है।

अंत में यह दूआ पढ़ना सन्नत है << अश्हदो अल्लाइलाहा इल्लल्लाहो वहदहू ला शरीक़ा लहू व अश्हदो अन्ना मोहम्मदन अब्दोहू व रसूलोहू अल्लाहुम्मजअल्नी मिनत्तव्वाबीना वजअल्नी मिनल मुततह्हिरीन >> ( सुनन तिर्मिज़ी वुज़ू के iguazu-falls-wide)

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