धर्म इस्लाम के कारण परेशानियाँ

अल्लाह तआला ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को निर्देश दिया कि अब लोगों को एक अल्लाह की इबादत और उपासना की ओर खुल्लम खुल्ला निमन्त्रण करो, अल्लाह के सिवा की इबादत और पूजा का विरोध करो, अल्लाह तआला ने यह आयत अवतरित की।
فاصدع بما تؤمر
” जिस चीज़ के पहुंचाने का आदेश तुम्हें मिलता है उसे स्पष्ट रूप से लोगों तक पहुंचा दिजीये।” (सूरः )
अल्लाह तआला के इस आदेश के अनुसार रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सफा पर्वत पर चढ़ गये और अरब वासियों के रिति रेवाज के अनुसार लोगों को पूकारा, जब लोग एकठ्ठा हो गये तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक उदाहरण के माध्यम से अपनी सच्चाई और अमानतदारी को लोगो से कहल वाया, जब लोगों ने आप के सच्चा और अमानतदार होने की गवाही दी तो आप ने उन लोगों से कहा, ऐ लोगों! एक अल्लाह की पूजा करो और उस के सिवा का इनकार करो, सफलता प्राप्त करोगे। जब रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने नबी और रसूल होने की घोषणा की और लोगों को एक अल्लाह की इबादत और उपासना की ओर निमन्त्रण की तो अच्छे हृदय वाले, सत्य को पसन्द करने वाले , बुराई से दूर रहने वाले व्यक्ति, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की निमन्त्रण को स्वीकार करने लगे, समुदाय के प्रत्येक प्रकार के लोग इस्लाम स्वीकार कर रहे थे। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को अल्लाह का सन्देष्ठा और रसूल होने का प्रतिज्ञा कर रहे थे। इस्लाम स्वीकार करने वालों की संख्या प्रति दिन अधिक से अधिक हो रही थीं, जिस के कारण इस्लाम के शत्रु आग बगोला होने लगे और इस्लाम स्वीकार करने वाले को हर प्रकार से सताने लगे , तक्लिफ देने लगे, ताकि लोग डर कर, भय खा कर इस्लाम से दूर रहे, इस्लाम स्वीकार न करे, इन में से कुछ का उदाहरण देता हूँ। सुमय्या नामी एक महीला को उनके गुप्तांग पर बरछा मार कर शहीद कर दिया गया। वह इस्लाम में शहीद होने वाली सब से पहली महीला थीं। उन के पुत्र अम्मार और पति यासिर को भी बहुत ज़्यादा यातनाऐं दी गईं। बेलाल (रज़ी अल्लाहु अन्हु) के मालिक ने उनके गले में रस्सा डाल कर बदमाश लड़को के हाथ में दे दिया जो उनको पर्वतों, गलियों में घसीटते फिरते थे , मक्का के गर्म रेतों पर उन्हें लिटा कर गर्म पत्थर उन के सीने पर रख दिया जाता था। परन्तु वह यही पुकारते थे कि ” अल्लाह एक है, अल्लाह एक है”। खब्बाब बिन अरत (रज़ी अल्लाहु अन्हु) जब मुसलमान हो गये तो धरती पर आग के शोले बिछा कर उस पर उन को लिटा दिया गया और एक दृष्ट व्यक्ति उनके सीने पर पैर रखे रहा ताकि आप करवट न ले सके, यहाँ तक कि आग बुझ गया और बहुत वर्षों के बाद उमर (रज़ी अल्लाहु अन्हु) ने उनका पीठ देखा तो पूरे पीठ पर सफेद दाग़ ( धब्बे) थे। ज़ुबैर बिन अव्वाम (रज़ी अल्लाहु अन्हु) ने जब इस्लाम स्वीकार किया तो उन के काका ने चटाइ में लपैट कर उनके नाक में धूंवां देते थे। और सईद बिन जैद को रस्सियों में जकड़ दिया जाता था। यह कुछ उदाहरण है जो आप के समक्ष बयान किया गया है। इसी तरह की बहुत सी कठिनाइंया, यातनाएं और कष्ठ प्रत्येक दिन यह नव मुस्लिम झेलते थे। परन्तु यह लोग इस्लाम पर डटे रहे और लोगों को इस्लाम की ओर बुलाते रहे।

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