नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पत्नियों को मूमिनों की माताऐं की उपाधि दी गई हैं, अल्लाह तआला ने उनकी आदर-सम्मान करते हुए यह ऊंचा पद प्रदान किया है। जैसा कि अल्लाह तआला का कथन है।
” النَّبِيُّ أَوْلَى بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ” (الأحزاب 6)
” निस्संदेह नबी को तो ईमानवालों के लिए उनके अपने खुद की अपेक्षा प्राथमिक्ता प्राप्त है और नबी की पत्नियाँ उनकी माँऐं हैं।” (सूरः अहज़ाबः6)
अल्लाह तआला ने उम्महातुल्मूअमेनीन (मूमिनों की माताऐं) को बहुत आदर-सम्मान किया है और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की इज़्ज़त की रक्षा करते हुए मुसलमानों को पर्दे के पीछे से बात करने का आदेश दिया है और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के घर में प्रवेश होते समय नियम का पालण करते हुए पहले अनुमति लेने का आदेश दिया है। अल्लाह तआला का पवित्र कुरआन में आदेश है।
” وَإِذَا سَأَلْتُمُوهُنَّ مَتَاعًا فَاسْأَلُوهُنَّ مِن وَرَاء حِجَابٍ ذَلِكُمْ أَطْهَرُ لِقُلُوبِكُمْ وَقُلُوبِهِنَّ” (الأحزاب:53 )
अल्लाह तआला ने जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पत्नियों को मूमिनों की माताऐं करार दिया तो अब मूमिनों के लिए नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के देहांत के बाद आप की पत्नियों से विवाह को वर्जित कर दिया है, और यह उम्महातुल्मूमेनीन मुसलमान महिलाओं में सब से उत्तम और प्रतिष्ठित थीं और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जीवन में धर्म की शिक्षा के प्रचार में बहुत सहायक थीं और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पत्नियों की संख्याँ 11 थीं, जिन में से दो पत्नियों का रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जीवन में ही देहांत हो गया था और 9 पत्नियों का रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के देहांत के बाद देहांत हुआ। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के विवाह करने को निरंतरण के अनुसार उम्महातुल्मूमेनीन के प्रति संछिप में कुछ बातें बयान किया जाता है।
(1) उम्मुल्मूमेनीन खदीजा बिन्ते खूवैलिद (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
यह प्रथम पत्नी थीं जिन से रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने विवाह किया। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इन से नबी बनाए जाने से पूर्व विवाह किया जब कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आयु 25 वर्ष और खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) की आयु 40 वर्ष थीं और दुसरे इतिहासकार के अनुसार आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आयु 25 वर्ष और खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) की आयु 28 वर्ष थीं और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ विवाहित जीवन 25 वर्ष तक रही जिस में एक दुसरे के लिए अतिप्रेम, मेल-मिलाप और सहायता थीं। इबराहीम के सिवा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सब बेटे-बेटियाँ खदीजा से जन्म लिया। और दो बेटे क़ासिम, अब्दुल्लाह और चार बेटियाँ जैनब, रुक़य्या , उम्मे कुल्षुम और फातिमा हैं। जब अल्लाह तआला ने आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को नबी और रसूल बनाया तो खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) सब से पहले आप पर ईमान लाईं और प्रत्येक प्रकार से मदद किया। हमेशा आप का समर्थन करती रहीं, धर्म के रासते में आने वाली परेशानियों में दिल जोई करती रहीं। नबुव्वत के दस्वे वर्ष खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) का देहांत हो गया। और उन से कुछ दिन पहले आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के चाचा अबू तालिब का देहांत हो चुका था जिस कारण आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बहुत ज़्यादा दुखी हुए। खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के देहांत के बाद भी हमेशा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उन को याद करते थे और खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के सहेलियों को उपहार देते थे, जैसा कि आईशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) कहती हैं ” नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पत्नियों पर मुझे रशक (प्रतिस्पर्धा) नहीं आया जित्ना खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) से रश्क (प्रतिस्पर्धा) आया और मैं ने उन्हें देखा भी नहीं क्योंकि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसको बहुत याद करते थे और जब कभी बकरी जब्ह करते तो उस में कुछ खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के सहेलियों को भेजा करते थे ” (सही बुखारी )
(2) उम्मुल्मूमेनीन सौदा बिन्ते ज़म्अह (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इन से मक्का में हिज्रत से पहले और खदीजा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के देहांत के बाद विवाह किया। विवाह के समय सौदा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) की आयु 55 वर्ष की थीं। जब 55 वर्ष की आयु में विद्वाह हो गई तो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इन की आदर-सम्मान को बढ़ाते हुए और उनके हृदय की शान्ति के लिए विवाह किया। हिज्रत करके मदीना आई और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के देहांत तक आप के साथ थीं और उमर बिन खत्ताब के शासन में देहांत हुआ।
(3) उम्मुल्मूमेनीन आईशा बिन्ते अबी बकर सिद्दीक़ (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नबी बनाए जाने के चार वर्ष बाद आईशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) का जन्म हुआ। आईशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) अपनी बहिन अस्मा के साथ छोटी उमर में इस्लाम स्वीकार किया। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने आप से मक्का में हिज्रत से पहले विवाह किया और मदीना में रूख्सती हुई और आईशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के सिवाए रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सब विद्वाह महिलाओं से विवाह किया। आईशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) रसूल की सब से प्रितम पत्नी थीं और आईशा के पिता अबू बकर (रज़ी अल्लाहु अन्हुमा) रसूल के सब से प्रितम मित्र थे और जब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बीमार हुए तो अपनी सब पत्नियों से अनुमति ले कर आईशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के घर पर आ गये थे और आप (रज़ी अल्लाहु अन्हा) के पास रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का देहांत हुआ। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ रहते हुए बहुत सा ज्ञान प्राप्त किया जिस कारण बड़े बड़े सहाबा आप से बहुत सी धार्मिक चीज़ों के प्रति प्रश्न करते थे और 65 के आयु में सन 57 हिज्री में आप का देहांत हुआ।
(4) उम्मुल्मूमेनीन हफ्सा बिन्ते उमर (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा)
हफ्सा बिन्त उमर (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा) के पति युद्ध बद्र (सन 2 हिज्री) में शहीद हो गये थे। मित्रा के बंधन को शक्तिशाली बनाने के लिए रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हफ्सा बिन्ते उमर (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा) से विवाह किया और हफ्सा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) बहुत ज़्यादा रोज़ा रखती और नमाज़ पढ़ती थीं और जब अबू बकर के समय में कुरआन को इकट्ठा किया गया तो अस्ल नुस्खा आप के पास रखा गया और फिर उस्मान (रज़ी अल्लाहु अन्हु) के समय में आप से लेकर उस के बहुत से कापी करके विभिन्न इलाके में भेज दिया और हफ्सा बिन्ते उमर (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा) का देहांत अमीर मुआविया (रज़ी अल्लाहु अन्हु) के समय सन 45 हिज्री में हुआ।
(5) उम्मुल्मूमेनीन जैनब बिन्ते खुज़ैमा अल-हिलालीआ (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जैनब बिन्ते खुज़ैमा अल-हिलालीआ (रज़ी अल्लाहु अन्हा) से रमज़ान सन 3 हिज्री में विवाह किया। जैनब (रज़ी अल्लाहु अन्हा) गरीबों को बहुत खाना खिलाती थीं और उन लोगों की बहुत सहायता करती थीं, इसी कारण जैनब (रज़ी अल्लाहु अन्हा) को उम्मुल्मसाकीन (गरीबोंकी माता) कहा जाता था। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ विवाह के कुछ ही महीनों के बाद आप का देहांत हो गया।
(6) उम्मुल्मूमेनीन उम्मे सल्मा (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
आप का नाम हिन्द बिन्ते उमय्या अल्मख्जूमिया हैं। बहुत पहले अपने पति के साथ इस्लाम स्वीकार किया और मदीना की ओर हिज्ररत की और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सन 4 हिज्री में उनके पति अबू सलमा के देहांत के बाद विवाह किया। उम्मे सल्मा बहुत बुद्धीवाली और धार्मिक महिला थीं। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बहुत सी चीज़ों में आप से सलाह प्रामर्श करते थे और बहुत से यात्रा में इन्हें साथ रखते थे। आप का देहांत सन 61 हिज्री में हुआ।
(7) उम्मुल्मूमेनीन जैनब बिन्ते जहश (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सन 5 हिज्री में अल्लाह के आदेश के अनुसार इन से विवाह किया। इनका विवाह जैद बिन हारिसा (रज़ी अल्लाहु अन्हु) से था परन्तु दोनों के बीच निबाह न होने के कारण ज़ैद ने तलाक दे दिया। तो अल्लाह तआला ने जाहिलीयत के रीति-रेवाज को तोड़ते हुए आप की शादी जैनब (रज़ी अल्लाहु अन्हा) से कर दी। क्यों कि जैद (रज़ी अल्लाहु अन्हु) आप के मुंह बोले बेटे थे और अल्लाह तआला ने वलिमा के दिन उम्महातुल्मूमेनीन और मूमिन महिलाओं को पर्दा प्रयोग करने का आदेश दिया। जैनब (रज़ी अल्लाहु अन्हा) बहुत ज़्यादा दानशील थीं, सन 20 हिज्री में आप का देहांत हुआ और उमर बिन खत्ताब (रज़ी अल्लाहु अन्हु) ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाया। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पत्नियों में रसूल के देहांत के बाद सब से पहले इनका देहांत हुआ।
(8) उम्मुल्मूमेनीन जूवैरिया बिन्ते अलह़ारिस (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सन 6 हिज्री शाबान के महीने में युद्ध बनी मुस्तलक के बाद विवाह किया और युद्ध में वह दासी थीं परन्तु रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने स्वतंत्र करके विवाह किया। जब सहाबा (रज़ी अल्लाहु अन्हुम) को पता चला कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जूवैरिया से विवाह किय है तो सहाबा (रज़ी अल्लाहु अन्हुम) ने उन के कबिले के सब दासों को स्वतंत्र कर दिया। सन 56 हिज्री में 70 वर्ष की आयु में देहांत हुआ।
(9) उम्मुल्मूमेनीन सफीया बिन्ते ह़ुयय बिन्ते अखतब (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सन 7 हिज्री, युद्ध खैबर के बाद विवाह किया और युद्ध में वह दासी थीं परन्तु रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने स्वतंत्र करके विवाह किया। सफीया (रज़ी अल्लाहु अन्हा) का देहांत अमीर मुआविया (रज़ी अल्लाहु अन्हु) के समय में सन 50 हिज्री में हुआ।
(10) उम्मुल्मूमेनीन उम्मे हबीबा बिन्ते अबी सुफयान (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा)
आपका नाम रमला बिन्ते अबी सुफयान बिन हर्ब (रज़ी अल्लाहु अन्ह़ुमा) हैं। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उनके पति उबैदिल्लाह के धर्म से फिर जाने (अधर्मी) के बाद विवाह किया। वह अपने पति के साथ हब्शा में थीं तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हब्शा के राजा नजाशी को पत्र लिखा कि वह उम्मे हबीबा से उस का विवाह कर दे। तो नजाशी ने उम्मे हबीबा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) से आप का विवाह कर दिया। फिर उम्मुल्मूमेनीन उम्मे हबीबा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) सन 7 हिज्री में मदीना आप के घर तशरीफ लाई और उस्मान (रज़ी अल्लाहु अन्हु) ने वलीमा की दावत किया। उम्मे हबीबा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) का देहांत सन 44 हिज्री में हुआ। जब कि वह 70 वर्ष से अधिक की हो गईं थी।
(11) उम्मुल्मूमिनीन मैमूनह बिन्ते अलह़ारिस अल-हिलालीआ (रज़ी अल्लाहु अन्हा)
यह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सब से अन्तिम पत्नी हैं जिन से आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हिज्रत के सातवें वर्ष उम्रतुल्क़ज़ा में विवाह किया और उम्मुल्मूमिनीन मैमूनह (रज़ी अल्लाहु अन्हा) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के देहांत के बाद काफी लम्बी आयु पाईं और सन 51 हिज्री में आप का निधन हुआ और सरफ के स्थान पर आप को दफनाया गया क्यों की उन्हों ने वसीयत की थीं कि उन्हें वहाँ दफनाया जाए।
