सत्य धर्म की पहचान

islamधर्मों की तुलना करते समय तीन ही वस्तुएं सम्भव होती हैं:

(1) या तो सभी सत्य हैं

(2) या सभी असत्य हैं

(3) अथवा एक सत्य शेष असत्य हैं।

और जब समस्त धर्म मौलिक नियमों में एक दूसरे से भिन्न हैं तो सभी सत्य नहीं हो सकते, और न ही सभी असत्य ही हो सकते हैं क्यों कि ऐसी स्थिति में यह प्रश्न पैदा होता है कि मानव जाति को उसके सृष्टा ने सत्य का ज्ञान प्रदान नहीं किया। इस लिए मानना पड़ेगा कि एक ही धर्म सत्य है जिसकी खोज समाज के रीति रेवाज और पक्षपात से दूर हो कर ही की जा सकती है।

सत्य धर्म वही हो सकता है जिसमें निम्नलिखित 10 विशेषताएं पाई जाती हों:

(1) उसमें एक ईश्वर की कल्पना बिल्कुल स्पष्ट हो और उसके मानने वाले मात्र उसी के सामने अपना माथा टेकते हों।

(2) ईश्वर का अवतरित किया हुआ नियम कब, कहां, कैसे, किन पर उतरा स्पष्ट हो और वह स्वयं सुरक्षित भी हो।

(3) वह नियम जीवन के प्रत्येग विभाल पर प्रकाश डातला हो अर्थात् एक सम्पूर्ण जीवन व्यवस्था देता हो।

(4) जीवन व्यवस्था को पेश करने के लिए विश्वसनीय लोगों की हर युग में एक टीम एकत्र रही हो जिन्हों ने अमानतदारी से उसे अपने बाद वालों तक पहुंचाया हो।

(5)  जिसने मात्र जीवन व्यवस्था ही प्रस्तुत न की हो अपितु उसके आधार पर एक शान्तिपूर्ण शासन स्थापित हुआ हो, और उसी व्यवस्था के आधार पर शासन के प्रत्येक नियम बने हों।

(6) जिसकी शिक्षाएं जातिवाद और भेद भाव से ऊपर उठ कर सारे मानव को एक माता पिता की संतान सिद्ध करती हों।

(7) जिसकी शिक्षाएं सन्यासी बनने से रोकतीं और समाज में रहने और पारिवारिक जीवन बिताने पर बल देती हों और इसे भी पुण्य का कार्य सिद्ध करती हों।

(8) जिसकी शिक्षाएं बिल्कुल Modern और Up to Date हों, जिसके किसी नियम में Expiry Date न पाया जाता हो। हर स्थान, हर युग और हर मानव के लिए बिल्कुल फिट हों।

(9) जिसकी शिक्षाओं में मानव जाति की आध्यात्मिक शुद्धता के साथ उनकी प्रत्येक सांसारिक समस्याओं का समाधान भी पाया जाता हो।

(10) जिसका संदेश एक विश्वव्यापी संदेश हो, विशेष स्थान, विशेष समुदाय, विशेष युग तक सीमित न हो अपितु सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शन करता हो।         

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *