तयम्मुम करने का तरीक़ा

  नमाज़ के लिए वुज़ू शर्त है, और वुज़ू के लिए पानी जरूरी है, यदि आपको पानी न मिल सके तो क्या करेंगे  

तयम्मुम का तरीका

अल्लाह तआला ने अपनी असीम दया से मुसलमानों पर यह एहसान भी फ़रमाया है कि नमाज़ का समय हो जाए और खोज के बावजूद पानी न मिले, या पानी मौजूद हो लेकिन उसके प्रयोग से बीमारी में वृद्धि की आशंका हो, तो ऐसी स्थिति में पाकीज़ा मिट्टी या उसके समान सामग्री से तयम्मुम कर के नमाज़ अदा की जा सकती है। अल्लाह का फरमान हैः अनुवाद: “अगर आप पानी उपलब्ध न आए तो पाकीज़ा मिट्टी से तयम्मुम कर लेना करो”. (अल-निसा: 34)  और हज़रत अबू ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, नबी सल्ल. ने फ़रमाया “बेशक पवित्र मिट्टी मुसलमान की पवित्रता प्राप्त करने का सामान है, यधपि उसे दस साल तक पानी उपलब्ध न हो , हाँ जब पानी मिल जाए तो उसे चाहिए कि उसे प्रयोग करे, इसके लिए यही बेहतर है “। (तिर्मिज़ी, अहमद)

तयम्मुम का समय क्या होगा? तो अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्ल.) ने बुखारी और मुस्लिम की रिवायत के अनुसार हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि. को एक यात्रा में स्नान करने की आवश्यकता पड़ गई, पानी न मिला जिसके कारण उन्हों ने ज़मीन पर लोट पोट कर लिया जिस प्रकार जानवर लोट पोट होता है फिर नमाज़ पढ़ी और यात्रा से लौटने के बाद अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्ल.) के पास आकर घटना से सूचित किया, तो पैगम्बर सल्ल. ने उनको तयम्मुम करने का तरीका बताते होए फरमाया:

إنما يكفيك أن تقول بيديك هكذا ثم ضرب بكفيه الأرض ونفخ فيهما ثم مسح بهما وجهه وكفيه

यानी ऐ अम्मार! तुम्हारे लिए ऐसा करना काफी था, फिर आपने अपनी दोनों हथेलियों को भूमि पर मारा और उनमें फूंका, फिर उसे अपने चेहरे और हथेलियों पर फेर लिया. इस तरह तयम्मुम का तरीका यह हुआ कि दिल में तयम्मुम की नियत करें। बिस्मिल्लाह पढ़ें। अपने दोनों हाथ शुद्ध मिट्टी या रेत आदि पर मारें, उनको झाड़ें, और उस में फूंक मारें, फिर चेहरे पर मल लें, फिर दोनों हाथों को एक दूसरे पर कलाई के जोड़ तक मल लें। (बुखारी, मुस्लिम) यानी पहले बायां हाथ दाहिने हाथ के पीछे कलाई के जोड़ तक और फिर दाहिना हाथ बाएं के पीछे पर कलाई के जोड़ तक मलें।

बलात्कार का सही समाधान इस्लाम में है

दिल्ली में चलती बस में वहशी दरिंदों की सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई छात्रा की मौत पर हम सब लगता है जाग गए हैं। पर इस प्रकार की जो भी समस्याएं पैदा होती हैं उनका सही समाधान इस्लाम ही पैश करता है। आज ज़रूरत है कि इस्लाम की शिक्षाओं की ओर झाँक कर देखा जाए जो मानव के सृष्टा की ओर से अवतरित हुआ है। और सृष्टा ही सृष्टि की हित को सही रूप में समझ सकता है।

इस्लाम महिला को ऐसे वस्त्र पहनने से रोकता है जिस से पुरुषों के जज़बात भर्कें। फिर पुरुषों तथा महिलोओं दोनों को भी निगाह नीची रखने का आदेश देता है।

 उसके बाद भी यदि कोई व्यभीचार करता है तो इस्लाम का आदेश यह है कि यदि वह विवाहित है तो उसे पत्थर से मार मार कर नष्ट कर दिया जाए और यदि विवाहित नहीं है तो उसे 100 कुड़े मारे जाएं और एक वर्ष के लिए देश निकाला दिया जाए।

 जिस समय यह नियम पूर्ण रूप में लागू था इस्लामी इतिहास साक्षी है कि इस प्रकार के दुष्कर्म बिल्कुल देखने को नहीं मिले। और यदि एकांत में एक व्यक्ति से ऐसा अपराध हुआ भी तो वह दौड़ा दोड़ा मुहम्मद सल्ल0 की सेवा में उपस्थित हुआ कि उसे पवित्र कर दिया जाए।

 इस लिए कि इस्लाम सब से पहले हृदय को बदलता है। आज बलात्कारियों के लिए कैसे भी नियम बना दिए जाएं जब तक दिल नहीं बदलेगा, अपने प्रभु के समक्ष उपस्थित होने का भय पैदा न होगा जब तक नियम और क़ानून बनाने के बावजूद  किसी भी अपराध पर नियंत्रण पाना असम्भव है।

इस्लाम की खोज कीजिए

ईश्वर का नाम लेते तो सब हैं परन्तु उसे पहचानते बहुत कम लोग हैं।
जब सब का ईश्वर एक है, तो धर्म अलग अलग क्यों?
क्या ईश्वर ने मानव की रचना करने के बाद उनका मार्गदर्शन नहीं क्या ?
यदि किया तो कैसे?
आज हम कैसे जानेंगे कि ईश्वर का उतारा हुआ धर्म पूर्ण रूप में सुरक्षित है?
इन प्रश्नों का उत्तर जानने के इच्छुक हैं तो अवश्य इस लिंक से लाभ उठाएं !!!

पुस्तक

पम्फलेट

विडियो

महत्वपूर्ण बातें

यदि लोग विशाल ह्रदय से इस्लाम का अध्ययन करें तो समझ में आ जाए कि वह जिस धर्म का विरोद्ध कर रहे थे वह उनकी धरोहर थी।

 ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

कुछ सज्जन कहते हैं कि धर्म की बात छोड़ो इनसानियत की बात करो। क्या इनसानियत बिना धर्म के शान्तिपूर्ण जीवन बिता सकती है। मैं कहता हूं नहीं। लेकिन बंधुओ! मानव को उस धर्म की खोज करने की आवश्यकता है जो मानवीय ज़रूरत है।

 ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने की सामग्रियाँ हमें प्राप्त हैं परन्तु आत्मा की आवश्यकताओं को पूरा करने की सामग्रियाँ हमारे पास नहीं हैं, इसके लिए हमें ईश्वर के मार्गदर्शन की ज़रूरत पड़ती है। परन्तु यह काम मानव ने किया जिसके कारण विभिन्न धर्म उत्पन्न हो गए। आज उस धरोहर की खोज करने की आवश्यकता है जो ईश्वर( अल्लाह) की ओर से आई है सम्पूर्ण संसार के लिए…

 ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

 इस्लाम धर्म इतना ही पुराना है जितना कि मानव। यही वह धर्म है जिसकी शिक्षा प्रथम मनुष्य को दी गई थी। और मुहम्मद सल्ल0 इस्लाम के संस्थापक नहीं अपितु इस्लाम के अन्तिम संदेष्टा हैं, अब उनके बाद कोई संदेष्टा और क़ुरआन के बाद कोई ग्रन्थ आने वाला नहीं कि उनका संदेश सुरक्षित और सम्पूर्ण मानव जाति के लिए है।

   ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

क्या आप जानते हैं कि पूरे संसार विशेष रूप में अमेरिका और युरोप में सब से अधिक फैलने वाला धर्म इस्लाम है ? क्यों ? इस लिए कि यह प्राकृतिक धर्म है। मानव बुद्धि को अपिल करने वाला धर्म। मात्र एक ईश्वर( अल्लाह ) की पूजा और मानव समानता पर इस्लाम बल देता है। जब हमारा पैदा करने वाला एक और हम एक ही माता पिता से पैदा भी हुए तो हमारा धर्म अलग अलग कैसे हो जाएगा।

  ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

ईश्वर को पहचान लेने से आदमी हर प्रकार की गुलामी से मुक्त हो जाता है। आज अधिकांश लोगों का रिश्ता ऊपर वाले से कट चुका है, इस लिए वह हज़ारों दरवाज़े पर सर टेक रहे हैं। इस्लाम ने कहा कि तुम्हारा माथा मात्र एक अल्लाह के सामने झुकना चाहिए, इसे किसी अन्य के सामने झुकाना इस शरीर के सृष्टिकर्ता का अपमान है।

 
  ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

इस्लाम शान्ति का धर्म था, है और महा-प्रलय के दिन तक शान्ति का धर्म रहेगा कि यह मानव जाति के लिए आया है। यह विश्वव्यापी धर्म है, अन्य धर्मों के समान किसी जाति की ओर नहीं अपितु (1) सबका ईश्वर एक तो पूज्य भी एक ही होना चाहिए। (2) और सारे मानवजाति एक ही माता पिता की संतान हैं…तो जातिवाद क्यों कर।

  ٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭٭

लोग इस्लाम का विरोद्ध क्यों करते हैं हालाँकि यह उन्हीं का धर्म है। मेरे ख्याल में ऐसा वह अज्ञानताक के कारण करते हैं।क्यों कि जब वह सत्य को समझ लेते हैं तो अपने किए पर पछताते हैं। यह प्रमाण है इस बात का कि… वह अपने ईश्वर का नाम तो लेते हैं परन्तु उसको पहचानते नहीं।

 

मानव जीवन की सब से बड़ी समस्या

इस समय मानव जिन समस्याओं में उल्झा हुआ है उनमें सब से पेचीदा समस्या न हथ्यार की समस्या है और न एटम बम और मीज़ाइल की। वास्तविक समस्या यह है कि मानव अपनी मानवता खो बैठा है। स्वयं को अच्छे चरित्र से इस प्रकार अलग कर दिया है कि तुच्छ स्वार्थ के लिए कुछ लोगों का ही नहीं अपितु पूरे समुदाय का खून और सारे इंसानों की तबाही पर उतारू बना हुआ है। आज मानव ने फिजिक्स, केमिस्ट्री, विज्ञान और मैथमैटिक्स में कमाल हासिल करना शुरू किया है। यह अच्छी चीज़ है और ऐसे ज्ञानों की मानव को आवश्यकता भी है, लेकिन इन ज्ञानों से सारी चीज़ें बनाइ जा सकती हैं पर इनसान नहीं बनाए जा सकते। यहीं पर हमें धर्म की आवश्यकता पड़ती है, इनसान को इनसान बनाना है तो धर्म का सहारा लेना ही होगा। कुरआन कहता हैः

” वह अल्लाह ही है जो धरती और आकाश को थामे हुए है ताकि वह अपने केन्द्र से हट न सकें। यदि वह अपने केन्द्र से हट जाएं तो अल्लाह के अतिरिक्त अन्य कोई उनको थामने वाला नहीं।

रमज़ान का महत्तव

रमज़ान का महीना इस्लामी कलेंडर के अनुसार नवाँ महीना है। यह महीना दया, क्षमा, नरक से मुक्ति तथा पारस्परिक सहानुभूति का महीना है। इसमें स्वर्ग के द्वार खोल दिए जाते हैं, नरक के द्वार बन्द कर दिए जाते हैं और शैतानों को बैड़ियों में जक़ड़ दिया जाता है। इस प्रकार इनसान की आध्यात्मिक प्रगति के रास्ते से बहुत बड़ी रुकावट दूर हो जाती है और उसके लिए नेकियों के काम बहुत आसान हो जाते हैं।
इस महीने में नेकियों का प्रत्युपकार भी बढ़ा दिया जाता है, नफिल नमाज़ों का पुण्य फर्ज़ नमाज़ों के समान औऱ फर्ज़ नमाज़ों का पुण्य दूसरे महीने में सत्तर पूण्य के समान कर दिया जाता है और प्रार्थनाएं स्वीकार की जाती हैं। इसी महीने में क़ुरआन जैसे पवित्र ग्रन्थ का अवतरण हुआ जो सम्पूर्ण संसार का मार्गदर्शक है। इसी महीने में शबे क़द्र ( सम्मानित रात्री) आती है जो हज़ार महीनों अर्थात् 83 वर्ण 4 महीने से उत्तम है।
सारांश यह कि यह महीना अति उत्तम और श्रेष्ठ है जिसमें हर ओर नेकियों का वातावरण होता है मानो यह नेकियों का वसंत ऋतु है ।मुहम्मद स0 के प्रवचनों में आता है कि जिसने रमज़ान का महीना पाया और उसके पाप न क्षमा किए जा सके तो वह मानो हर भलाई से वंचित है।

सत्य धर्म की पहचान क्या है ?

सत्य धर्म वह है….

(1) जिसने सारे मानव के लिए मात्र एक ईश्वर की सही कल्पना दी हो । उसमें ईश्वर का विभाजन न किया गया हो।

(2) जो मानवता को जाति वर्गों में न बांटता हो।

(2) जिसका ग्रन्थ पूर्ण रूप में सुरक्षित हो ।

(3) जिस संदेष्टा पर वह ग्रन्थ अवतरित हुआ उसकी जीवनी उजव्वल और शुद्ध हो ।

(4) उसकी शिक्षाए बुद्धि संगल हों।

(5) उन शिक्षाओं का सम्बन्ध जीवन के प्रत्येक भाग से हो।

(6) उन शिक्षाओं के आधार पर एक शान्तिपूर्ण समाज की स्थापना हर युग और हर स्थान पर हो सकती हो।

यह विशेषताएं यदि किसी धर्म में पाई जाती हैं तो वह है इस्लाम और मात्र इस्लाम। इस लिए  इस्लाम ही विश्व धर्म हो सकता है।

वार्ता

Facebook © 2012

एक गुरु है, और दो शिष्य हैं. एक शिष्य बिना सोचे समझे गुरु का अनुकरण करता है. दूसरा शिष्य अपनी शंका का निवारण करता है और उसके बाद ही गुरु का अनुकरण करता है.

  • आज सुबह पार्क में एक सज्जन ने सनातन हिन्दू धर्म और इस्लाम में यह अंतर बताया.
    कौन सही है?
      • नमः शिवाय शिवाय नमःin logo ko sirf pichwada utana atta hai koi bhas karni nahi ati ye sach hai 100 feesdi sach nahi to puch lo inse ye namaj mai apna pichwada kyo uttate hai


      • Safatalam Taimiइस्लाम की कोई भी शिक्षा जैसा कि कहा अंधविश्वार पर आधारित नहीं। यहाँ 100 % प्रमाणित बातें हैं। क़ुरआन औऱ मुहम्मद साहब की जीवनी का अध्ययन तो कर के देखें। कब तक अपने ही गुरू का विरोद्ध करते रहेंगे। वह आपके औऱ सम्पूर्ण संसार के लिए आए थे।

      • Safatalam Taimi (1) वह अल्लाह एक है।
        (2) उसको किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं पड़ती।
        (3) उसके पास माता पिता नहीं।
        (4) उसके पास संतान नहीं।
        (5) उसका कोई भागीदार नहीं।

      • सुरेश चंद्र गुप्तासफातआलम, बस एक बार ईमानदारी से जो तुमने लिखा है उसे पढ़ो, तुम्हें खुद यह सब अन्धविश्वास नजर आएगा.


      • नमः शिवाय शिवाय नमःjara koi pramn to do kon se parmanit hai ager tum to tum tumhara wo mollwi kaji ya koi bhi ho or khas kar wo jikir nayak ek no ka zhuta usko bhi bula lo ko bhas karke dekh lo gare wo mujko jawab de de to mai islam swikar kar lunga


      • Ashish Kumarhaan bilkul 100% science, or Mohammed ke jeevan pe h islaam kun, Mohammed khud apne sex life se pareshan tha, and log os pe haste the, is liye osne “Khtane” jaise ghatiya kaam shuru kiya………agar “alla” main itna hi dum hai toh to muslims ko janm se hi “katwa” ku nahi paida karta, iska jawab kya h ?


      • Safatalam Taimi“जिस प्रभु का बड़ा प्रसिद्ध यश है उसकी कोई प्रतिमा नहीं है।”

      • Safatalam Taimi ज़रा श्रीमद्-भागवतगीता (7/24) को उठा कर देखिए कैसे ऐसी आस्था रखने वालों को बुद्धिहीन की संज्ञा दी हैः
        अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम।।24।।
        “मैं अविनाशी, सर्वश्रेष्ठ औऱ सर्वशक्तिमान हूं। अपनी शक्ति से सम्पूर्ण संसार को चला रहा हूं, बुद्धिहीन लोग मुझे न जानने के कारण मनुष्य के समान शरीर धारण करने वाला मानते हैं।”

      • नमः शिवाय शिवाय नमःjab uska koi sach he nahi hai to phir partima kha se hoge


      • Safatalam Taimiआप स्वयं अपने धार्मिक गर्न्थों की ओर भी तो कम से कम आएं ताकि सत्य क्या है समझ में आ सके।

      • Saket Biharisafatalam bhai yadi muhammad sahab islam ko antim swaroop dene wale hain to unse pahle islam ke astitva hone ka kya praman hai ……….. jabki tatkallen arab ke entire people murtipoojak the .


      • Ashish Kumaragar “Allah” ko kisi ki zaroorat nahi hai toh ose ” kafir” ku kehte hai jo is “Allah” ko nahi manta. Kyun ose mar diya jata h ? Jab “allah” ko kisi ki zaroorat nahi toh ” kun nahi ” Kafir” ko oske haal pe chod deta.Muslmaan ku duniya ko ” Mulla” ban-ne k liye pagal h


      • नमः शिवाय शिवाय नमःइस्लाम में…. लड़कियों का बचपन से यौन शोषण किया जाता है… और, उनके रक्षक जैसे कि….. उनके बाप.. भाई.. चाचा… मौसा… फूफा वगैरह ही उस बच्ची को निपटा देते हैं..


      • नमः शिवाय शिवाय नमःपढाई के उम्र में उन्हें ”शिक्षा” का अधिकार ही नहीं है…. (शरियत के अनुसार


      • Ashish KumarBhagwat Gita main jo lika oska galat arth mat kar, iska matlab ye h ki har insaan ishwar ka roop hai or swayam main poorn hai, inssan kamzor nahi hai. or insaan agar chahe to Ishwar ho sakta hai – jiase Yogi Krishn hue hai.Agar sahi baat na pata ho to galat comment mat karo !!


      • नमः शिवाय शिवाय नमः स्लाम में मर्द एक साथ 3 -4 बीबियाँ रख सकता है….!
        इस्लाम में किसी भी औरत को महज तीन बार तलाक-तलाक बोल कर तलाक दिया जा सकता है….!
        इस्लाम में… तलाक देने के बाद औरत को किसी भी प्रकार का “”गुजारा भत्ता”” देने का कोई प्रावधान नहीं है…!
        इस्लाम में औरतों के लिए जन्नत में कोई जगह नहीं ..इसलिए इस्लाम कोई धरम हो है नही सकता जो जननी को है समान ना दे सके वो समाज मे क्या देगा सिर्फ़ जहर है उगलेगा ओर यही हो भी रहा है


      • Ashish Kumarjise apni history bhi nahi pata wo hume Bhagwat Gita samjha raha h


      • Safatalam TaimiSaket Bihari जी आपने बड़ी अच्छी बात कही बात यह है कि ईश्वर ने मानव को संसार में बसाया तो अपने बसाने के उद्देश्य से अवगत करने के लिए हर युग में मानव ही में से कुछ पवित्र लोगों का चयन किया ताकि वह मानव मार्गदर्शन कर सकें वह हर देश और हर युग… में भेजे गए उनकी संख्या एक लाख चौबीस हज़ार तक पहुंचती हैं, वह अपने समाज के श्रेष्ट लोगों में से होते थे, तथा हर प्रकार के दोषों से मुक्त होते थे। उन सब का संदेश एक ही था कि केवल एक ईश्वर की पूजा की जाए, मुर्ती पूजा से बचा जाए तथा सारे मानव समान हैं उनमें जाति अथवा वंश के आधार पर कोई भेदभाव नहीं क्यों कि उनकी रचना एक ही ईश्वर ने की है
      • Safatalam Taimiपरन्तु यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि पहले तो लोगों ने उन्हें ईश्दूत मानने से इनकार किया कि वह तो हमारे ही जैसा शरीर रखने वाले हैं फिर जब उनमें असाधारण गुण देख कर उन पर श्रृद्धा भरी नज़र डाला तो किसी समूह ने उन्हें ईश्वर का अवतार मान लिया तो किसी ने उन्हें ईश्वर की संतान मान कर उन्हीं की पूजा आरम्भ कर दी।

      • Safatalam Taimi फिर क्या हुआ

      • Safatalam Taimiजब सातवी शताब्दी में मानव बुद्धि प्रगति कर गई और एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध बढ़ने लगा को ईश्वर ने अलग अलग हर देश में संदेश भेजने के नियम को समाप्त करते हुए विश्वनायक का चयन किया। जिन्हें हम मुहम्मद सल्ल0 कहते हैं, उनके पश्चात कोई संदे…ष्टा आने वाला नहीं है, ईश्वर ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 को सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शक बना कर भेजा और आप पर अन्तिम ग्रन्थ क़ुरआन अवतरित किया जिसका संदेश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए है । उनके समान धरते ने न किसी को देखा न देख सकती है। वही कल्कि अवतार हैं जिनकी हिन्दुसमाज में आज प्रतीक्षा हो रही है।مشاهدة المزيد

      • Ashish Kumarhahaha, agar aisa h toh islam main itna batwara ku hai, Sufi, Shiya, Sunni, Barweli etc etc. kaha se a gaye, iska jawab do . Nahi to ghar jao, tumhe kuch bhi nahi pata na hi Islam ke bare main hi Hindu ke bare main


      • Ashish Kumarbakwass, itna sanki or vikrit admi kalki avtar ho hi nahi sakta !!


      • Safatalam Taimiसब से पहली बात कि किसी भी धर्म को उसके सिद्धान्त से जाना जाता है न कि उसके मानने वालों से …. विशेष रूप में आज के युग में… चाहे किसी भी धर्म की बात हो उसके सिद्धांत को देखना होगा क्यों कि बहुत से लोग यह भी नहीं जानते कि उनका धर्म क्या कहता है। यह पहली बात हुई

      • नमः शिवाय शिवाय नमःtum baar baar bhagwat geeta ko beach mai kyo la rahe ho jis trah se tum log kuran galat ayte pade ho humko bhi apne jaisa murkh bana chate ho


      • Ashish Kumaryahi toh baat hai “Bahut se log ye bhi nahi jante ki onka, mana hua, bakwas, adhviswashi or sanki keetaab ka matlab kya hai ‘


      • नमः शिवाय शिवाय नमःkua tumne sikandar kaa naam suna hai


      • Safatalam Taimiमुसलमानों में बुरे लोगों की मौजूदगी के बावजूद मुसलमान कुल मिलाकर दुनिया के सबसे अच्छे लोग हैं। मुसलमान ही वह समुदाय है जिसमें शराब पीने वालों की संख्या सबसे कम है और शराब न पीने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा। मुसलमान कुल मिलाकर दुनिया में सबसे ज़्यादा धन-दौलत ग़रीबों और भलाई के कामों में ख़र्च करते हैं। सुशीलता, शर्म व हया, सादगी और शिष्टाचार, मानवीय मूल्यों और नैतिकता के मामले में मुसलमान दूसरों के मुक़ाबले में बहुत बढ़कर हैं।

      • Safatalam Taimiअगर आपको किसी कार के बारे में यह अंदाज़ा लगाना हो कि वह कितनी अच्छी है और फिर एक ऐसा शख़्स जो कार चलाने की विधि से परिचित न हो लेकिन वह कार चलाना चाहे तो आप किसको दोष देंगे। कार को या ड्राइवर को। स्पष्ट है कि इसके लिए ड्राइवर को ही दोषी ठहराया जाएगा।

      • Safatalam Taimi अगर आप व्यावहारिक रूप से जानना चाहते हैं कि कार कितनी अच्छी है तो उसको चलाने पर एक माहिर कार ड्राइवर को नियुक्त कीजिए। इसी तरह सबसे बेहतर और इस्लाम पर अमल करने के लिहाज़ से सबसे अच्छा नमूना जिसके द्वारा आप इस्लाम की असल ख़ूबी को जान सकते हैं पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) हैं।
        बहुत से ईमानदार और निष्पक्ष ग़ैर-मुस्लिम इतिहासकारों ने भी इस बात का साफ़-साफ़ उल्लेख किया है कि पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) सबसे अच्छे इंसान थे।

      • Safatalam Taimiमाइकल एच॰ हार्ट जिसने ‘इतिहास के सौ महत्वपूर्ण प्रभावशाली लोग’ पुस्तक लिखी है उसने इतिहास के एक सौ महान व्यक्तियों में सबसे पहला स्थान पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को दिया है। ग़ैर-मुस्लिमों द्वारा पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को श्रद्धांजली प्रस्तुत करने के इस प्रकार के अनेक नमूने हैं।

      • नमः शिवाय शिवाय नमःthik kah rahe ho jo tumhara muhamd tha wo ek sarabi tha lundiya baaj tha jo apni 7 saal ki ladki ko bhi hawas kaa sikar bana liay


      • Safatalam Taimiबस ज़रूरत है कि हम निःपक्ष हो कर इस्लाम का अध्ययन करें। मेरी आशा है कि ऐसा ही होगा। धन्यवाद

      • नमः शिवाय शिवाय नमःsabse jayda chor muslim, sabse jayda sarab pene wale muslim, apni bahan ki izzat lootne wale muslim(bhanchod sabad yahi se suru hua tha or mather chod bhi) kyoki tumhare muhmad ne apni chachi ko bhi nahi choda tha


      • Safatalam Taimiयदि मैं यही बात आप के प्रति बोलूं तो कैसा लगेगा आपको… झूट कभी नहीं बोलना चाहिए।

      • Safatalam Taimiप्लीज़ कुरआन कहता है ध्यान दें : किसी समुदाय से दुश्मनी तुझे इस बात पर न उभारे कि तुम न्याय से फिर जाओ, न्याय करो यह संयम से ज्यादा क़रीब है।

      • Ashish Kumar

        hahhaha is liye Jannat main Sharab ke chasme nbehte hai, Jehad main logo ko marne walon ko jannat milti h, sharm or haya ki baat toh chod hi do…………abhi mere gaon Mathura main dange hue kis baat pe ” Ek hindu parivar Ekadashi main pa…yson ko pani pila raha tha, tabhi wahan 1 mulla ke a kar apne kati-lulli se lagi haath os pani main dal kar haath dho liye, or jab ose bhagaya gaya toh mullon ne danga kar diya. Ek bhudiya ke ghar main aag laga di, ose maar kar oski beti ko otha kar le gayi, haramzade – shishtachar ki baat karte ho”or jati-pati ke naam pe abhi isi admi ne hindu dharm ko bekar kaha tha, kab maine mullon ki jati, bhedbhaw or apsi foot ki baat ki toh jawab dene ki bajaye, idhar odhar ki bakwas kar raha hai. jati ke peeche kya science hai kuch pata bhi hai? NIyam , sanskar, reeti-reewaj kis liye banaye gaye hai mullon ko kya pata !!!Jo sirf ayeyashi karna jante hai wo hume tameez na seekhayen !!مشاهدة المزيد


      • Ashish Kumarbatao Hindun ne kab danga shuru kiya, 1 bhi ghatna batao……baat karten hain tehjeeb ki !!


      • नमः शिवाय शिवाय नमःbhai jaan mai ye baat kuran ke dwara likhi hui baata raha hu ager isme koi galat hai to baat na kon se galat baat hai kya apke yaha ye sab nahi ho raha hai


      • नमः शिवाय शिवाय नमःor ek baat bata du saftalam jee jis din ek carod logo ne hindu dharam ke liye ladne ki soch lee na us din tum logo kahi bhi jagah nahi mil payegi or ye baat ap log jante bhi hoge


      • Safatalam TaimiAshish Kumar जी ! इस्लाम शान्ति का धर्म है, और मुहम्मद साहब के सम्बन्ध में कुरआन कहता है कि हमने उनको समपूर्ण संसार के लिए दयालु बना कर भेजा है। मुहम्मद साहब से बढ़ कर शान्तिवाद इस धरती पर पैदा नहीं हुआ।

      • Ashish Kumarhaan wo toh humne dekh hi liye Islam ke baat is duniya main kitni shanti ayi h . Toh ap mehrbani karke ye sab jhut na bole………….waise bhi apne itne sare galat-shalat thatye yahan bol diye ki ab ap se baat karne ka koi fayda nahi.waise bhi ap 1 bhi sawal ka jawab nahi de paye, toh kripya shant rahe .


      • Safatalam Taimiनमः शिवाय शिवाय नमःजी ! इस्लाम की शिक्षा है कि किसी पर आरोप मत लगाओ, आपने मुहम्मद साहब की जीवनी का अध्ययन नहीं किया है , यदि किया होता तो जानते कि अरब के वातावरण में चालीस वर्ष तक शराब को मुंह तक न लगाया था हालांकि शराब पीना अरबों की आदत थी। किसी महिला की ओर आँख तक न उठाया था जबकि व्यभीचार के वह रसया थे

      • नमः शिवाय शिवाय नमःkitna zhut bolte ho tum log islam sirf or sirf zhut per he tika hai islam mai santi to wasi he hai jaise gadhe ke sir per seeng ka hona


      • Ashish KumarDhanyawaad. jai Shri Ram, ………………………….allah Hafiz !!


      • Safatalam Taimiचासीस वर्ष की आयु में उनको संदेष्टा बनाया गया तब तक सारे लोग उनको अमानदताद और सच्चा के नाम से पुकारते थे।

      • Safatalam Taimiआपने लोगों को बुराई से रोका। जुआ, शराब, व्यभिचार, और बेहयाई से मना किया। उच्च आचरण और नैतिकता की शिक्षा दी, एक ईश्वर का संदेश देते हुआ कहा कि «हे लोगो! एक ईश्वर की पूजा करो, सफल हो जा ओगे» सज्जन लोगों ने आपका अनुसरण किया और एक ईश्वर के नियम…ानुसार जीवन बिताने लगे। परन्तु जाति वाले जो विभिन्न बुराइयों में ग्रस्त थे, स्वयं अपने ही जैसे लोगों की पूजा करते थे और ईश्वर को भूल चुके थे, काबा में तीन सौ साठ मुर्तियाँ रखी थीं। जब आपने उनको बुराइयों से रोका तो सब आपका विरोद्ध करने लगे। आपके पीछे पड़ गए क्योंकि इस से उनके पूर्वजों के तरीक़े का खण्डन हो रहा था। पर सत्य इनसान की धरोहर हीता है उसका सम्बन्ध किसी जाति-विशेष से नहीं होता।مشاهدة المزيد

      • Safatalam Taimiक्या आप इस महापूरूष को जानते हैं: जिनके बीच चालीस वर्ष की अवधि बिताई थी और जिन्हों ने उनको सत्यवान और अमानतदार की उपाधि दे रखी थी वही आज आपके शत्रु बन गए थे। आपको गालियाँ दी, पत्थर मारा, रास्ते में काँटे बिछाए, आप पर पर ईमान लाने वालों को …एक दिन और दो दिन नहीं बल्कि निरंतर 13 वर्ष तक भयानक यातनायें दी, यहाँ तक कि आपको और आपके अनुयाइयों को जन्म-भूमी से भी निकाला, अपने घर-बार धन-सम्पत्ती को छोड़ कर मदीना चेले गए थे और उन पर आपके शुत्रुओं ने कब्ज़ा कर लिया था लेकिन मदीना पहुँचने के पश्चात भी शत्रुओं ने आपको और आपके साथियों को शान्ति से रहने न दिया। उनकी शत्रुता में कोई कमी न आई। आठ वर्ष तक आपके विरोद्ध लड़ाई ठाने रहे परन्तु आप और आपके अनुयाइयों नें उन सब कष्टों को सहन किया।مشاهدة المزيد

      • Safatalam Taimi फिर 21 वर्ष के बाद एक दिन वह भी आया कि आप के अनुयाइयों की संख्या दस हज़ार तक पहुंच चुकी थी और आप वह जन्म-भूमि (मक्का) जिस से आपको निकाल दिया गया था उस पर विजय पा चुके थे। प्रत्येक विरोद्धी और शुत्रु आपके कबज़ा में थे, यदि आप चाहते तो हर एक …से एक एक कर के बदला ले सकते थे और 21 वर्ष तक जो उन्हें चैन की साँस तक लेने नहीं दिया था सब्हों का सफाया कर सकते थे लेकिन आपको तो सम्पूर्ण मानवता के लिए दयालुता बना कर भेजा गया था। ऐसा आदेश देते तो कैसे ? उनका उद्देश्य तो पूरे जगत का कल्याण था इस लिए आपने लोगों की क्षमा का एलाम कर दिया।
        इस सार्वजनिक एलान का उन शत्रुओं पर ऐसा प्रभाव पड़ा कि मक्का विजय के समय आपके अनुयाइयों की संख्या मात्र दस हज़ार थी जब कि दो वर्ष के पश्चात अन्तिम हज के अवसर पर आपके अनुयाइयों की संख्या डेढ़ लाख हो गई।مشاهدة المزيد

      • Safatalam Taimi इस का कारण क्या था गाँधी जी के शब्दों में –
        « मुझे पहले से भी ज्यादा विश्वास हो गया है कि यह तलवार की शक्ति न थी जिसने इस्लाम के लिए विश्व क्षेत्र में विजय प्राप्त की, बल्कि यह इस्लाम के पैग़म्बर का अत्यंत सादा जीवन, आपकी निःसवार्थता, प्रति…ज्ञापालन और निर्भयता थी»।मित्रो ! रज़ा ग़ौर करो क्या इतिहास में कोई ऐसा इनसान पैदा हुआ जिसने मानव कल्याण के लिए अपनी पूरी जीवनी बिता दी और लोग 21 वर्ष तक उनका विरोद्ध करते रहे फिर एक दिन वह भी आया कि उन्हीं विरोद्धियों ने उनके संदेश को अपना कर पूरी दुनिया में फैल गए और लोगों ने उनके आचरण से प्रभावित हो कर इस संदेश को गले लगा लिया……॥???? तब ही तो हम उन्हें “जगत गुरु” कहते हैं।مشاهدة

गैर-मुस्लिम विद्वानों के विचार

स्वामी विवेकानंद (विश्व-विख्यात धर्मविद्)

‘‘…मुहम्मद (इन्सानी) बराबरी, इन्सानी भाईचारे और तमाम मुसलमानों के भाईचारे के पैग़म्बर थे। …जैसे ही कोई व्यक्ति इस्लाम स्वीकार करता है पूरा इस्लाम बिना किसी भेदभाव के उसका खुली बाहों से स्वागत करता है, जबकि कोई दूसरा धर्म ऐसा नहीं करता। …हमारा अनुभव है कि यदि किसी धर्म के अनुयायियों ने इस (इन्सानी) बराबरी को दिन-प्रतिदिन के जीवन में व्यावहारिक स्तर पर बरता है तो वे इस्लाम और सिर्फ़ इस्लाम के अनुयायी हैं।  —‘टीचिंग्स ऑफ विवेकानंद, पृष्ठ-214, 215, 217, 218) अद्वैत आश्रम, कोलकाता-2004

मुंशी प्रेमचंद (प्रसिद्ध साहित्यकार)

यह निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि इस (समता) के विषय में इस्लाम ने अन्य सभी सभ्यताओं को बहुत पीछे छोड़ दिया है। वे सिद्धांत जिनका श्रेय अब कार्ल मार्क्स और रूसो को दिया जा रहा है वास्तव में अरब के मरुस्थल में प्रसूत हुए थे और उनका जन्मदाता अरब का वह उम्मी (अनपढ़, निरक्षर व्यक्ति) था जिसका नाम मुहम्मद (सल्ल॰) है। मुहम्मद (सल्ल॰) के सिवाय संसार में और कौन धर्म प्रणेता हुआ है जिसने ख़ुदा के सिवाय किसी मनुष्य के सामने सिर झुकाना गुनाह ठहराया है…?’’ ‘‘…कोमल वर्ग के साथ तो इस्लाम ने जो सलूक किए हैं उनको देखते हुए अन्य समाजों का व्यवहार पाशविक जान पड़ता है। किस समाज में स्त्रियों का जायदाद पर इतना हक़ माना गया है जितना इस्लाम में? …हमारे विचार में वही सभ्यता श्रेष्ठ होने का दावा कर सकती है जो व्यक्ति को अधिक से अधिक उठने का अवसर दे। इस लिहाज़ से भी इस्लामी सभ्यता को कोई दूषित नहीं ठहरा सकता।’’—‘इस्लामी सभ्यता’ साप्ताहिक प्रताप विशेषांक दिसम्बर 1925

रामधारी सिंह दिनकर (प्रसिद्ध साहित्यकार और इतिहासकार)

‘‘जिस इस्लाम का प्रवर्त्तन हज़रत मुहम्मद ने किया था…वह धर्म, सचमुच, स्वच्छ धर्म था और उसके अनुयायी सच्चरित्र, दयालु, उदार, ईमानदार थे। उन्होंने मानवता को एक नया संदेश दिया, गिरते हुए लोगों को ऊँचा उठाया और पहले-पहल दुनिया में यह दृष्टांत उपस्थित किया कि धर्म के अन्दर रहने वाले सभी आपस में समान हैं। उन दिनों इस्लाम ने जो लड़ाइयाँ लड़ीं उनकी विवरण भी मनुष्य के चरित्रा को ऊँचा उठाने वाला है।’’—‘संस्कृति के चार अध्याय’लोक भारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 1994पृष्ठ-262, 278, 284, 326, 317

अन्नादुराई (डी॰एमके॰ के संस्थापक, भूतपूर्व मुख्यमंत्री तमिलनाडु)

‘‘इस्लाम के सिद्धांतों और धारणाओं की जितनी ज़रूरत छठी शताब्दी में दुनिया को थी, उससे कहीं बढ़कर उनकी ज़रूरत आज दुनिया को है, जो विभिन्न विचारधाराओं की खोज में ठोकरें खा रही है और कहीं भी उसे चैन नहीं मिल सका है।
जीवन-संबंधी इस्लामी दृष्टिकोण और इस्लामी जीवन-प्रणाली के हम इतने प्रशंसक क्यों हैं? सिर्फ़ इसलिए कि इस्लामी जीवन-सिद्धांत इन्सान के मन में उत्पन्न होने वाले सभी संदेहों ओर आशंकाओं का जवाब संतोषजनक ढंग से देते हैं।
अन्य धर्मों में शिर्व$ (बहुदेववाद) की शिक्षा मौजूद होने से हम जैसे लोग बहुत-सी हानियों का शिकार हुए हैं। शिर्क के रास्तों को बन्द करके इस्लाम इन्सान को बुलन्दी और उच्चता प्रदान करता है और पस्ती और उसके भयंकर परिणामों से मुक्ति दिलाता है।—‘मुहम्मद (सल्ल॰) का जीवन-चरित्रा’ पर भाषण 7 अक्टूबर 1957 ई॰

डॉ॰ बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर (बैरिस्टर, अध्यक्ष-संविधान निर्मात्री सभा)

‘‘…इस्लाम धर्म सम्पूर्ण एवं सार्वभौमिक धर्म है जो कि अपने सभी अनुयायियों से समानता का व्यवहार करता है (अर्थात् उनको समान समझता है)। यही कारण है कि सात करोड़ अछूत हिन्दू धर्म को छोड़ने के लिए सोच रहे हैं और यही कारण था कि गाँधी जी के पुत्र (हरिलाल) ने भी इस्लाम धर्म ग्रहण किया था। यह तलवार नहीं थी कि इस्लाम धर्म का इतना प्रभाव हुआ बल्कि वास्तव में यह थी सच्चाई और समानता जिसकी इस्लाम शिक्षा देता है…।’’

—‘दस स्पोक अम्बेडकर’ चौथा खंड—भगवान दास पृष्ठ 144-145 से उद्धृत
पेरियार ई॰ वी॰ रामास्वामी (राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत, द्रविड़ प्रबुद्ध विचारक, पत्रकार, समाजसेवक व नेता, तमिलनाडु)
 ‘‘…हमारा शूद्र होना एक भयंकर रोग है, यह कैंसर जैसा है। यह अत्यंत पुरानी शिकायत है। इसकी केवल एक ही दवा है, और वह है इस्लाम। इसकी कोई दूसरी दवा नहीं है। ‘‘…इस्लाम की स्थापना क्यों हुई? इसकी स्थापना अनेकेश्वरवाद और जन्मजात असमानताओं को मिटाने के लिए और ‘एक ईश्वर, एक इन्सान’ के सिद्धांत को लागू करने के लिए हुई, जिसमें किसी अंधविश्वास या मूर्ति-पूजा की गुंजाइश नहीं है। इस्लाम इन्सान को विवेकपूर्ण जीवन व्यतीत करने का मार्ग दिखाता है…।’’
—‘द वे ऑफ सैल्वेशन’ पृ॰ 13,14,21 से उद्धृत (18 मार्च 1947 को तिरुचिनपल्ली में दिया गया भाषण) अमन पब्लिकेशन्स, दिल्ली, 1995 ई॰